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मंगलवार, 15 दिसंबर 2009

भारत में सीजनल इंफ्लुएंजा (बुखार, जुकाम और खांसी) कभी चिंता का विषय नहीं रहे



लेकिन अब स्वाइन फ्लू का इतना पैनिक है कि मामूली बुखार भी हमारी चिंता को बढ़ा देता है। हालांकि एच 1 एन 1 वायरस इतना खतरनाक नहीं है जितना इसे समझा जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि यह बहुत ही हल्के किस्म का वायरस है। इससे होने वाली मौतें उस सीजनल बुखार, जुकाम और खांसी से कहीं कम हैं, जिनसे देशभर में रोजाना बड़ी तादाद में लोग मर जाते हैं।






विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक पूरी दुनिया में हर साल 250,000 से लेकर 500,000 लोग सीजनल इंफ्लुएंजा से मरते हैं। उधर, 6 दिसंबर तक एच 1 एन 1 से पूरी दुनिया में कुल 9596 मौतें हुई हैं। यह आंकड़ा भी डब्ल्यूएचओ का ही है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के डीजी डॉ. वी. एम. कटोच का कहना है कि अभी एच1एन1 वायरस का दबाव बहुत मामूली है, इस वजह से मौतें भी बहुत कम हुई हैं। उनका कहना है कि हालांकि इसका इन्फेक्शन चारों तरफ फैला हुआ है लेकिन जिन केसों को टेस्ट किया गया, उनमें पॉजिटिव केसों की संख्या अब भी बहुत कम है।






इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि 60 फीसदी लोगों ने जो अपनी एंटीबॉडीज विकसित की है, वे उससे इसका मुकाबला कर रहे हैं। उन पर इसके इन्फेक्शन का कोई असर नहीं है। यहां तक कि ऐसे लोगों को किसी क्लिनिकल टेस्ट की भी जरूरत नहीं पड़ी। सिर्फ 5 फीसदी लोगों में इसके लक्षण पाए गए। इन लोगों को टेस्ट भी हुआ। सिर्फ 3 फीसदी लोगों में इसके खतरनाक लक्षण पाए गए और उनमें से कुछ की मौतें भी हुईं।






इस वायरस को लेकर शुरुआत में जो पैनिक फैला, उसकी खास वजह यह थी कि लोगों में इसे लेकर न तो जागरूकता थी और न ही इसके इलाज के बारे में सही से जानकारी रखते थे। एम्स में मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. रणदीप गुलेरिया कहते हैं कि अब पैनिक खत्म हो चुका है लोग शुरुआत में ही इसकी सूचना देते हैं या टेस्ट करा लेते हैं। हालांकि ठंड बढ़ने पर इसके केसों की संख्या बढ़ी है। ऐसी आशंका भी थी। अब हर केस की लैब टेस्टिंग संभव नहीं है। इसका इलाज हमें कॉमन फ्लू की तरह ही करना होगा। अगर किसी को बहुत तेज बुखार आता है तो उसे टेमीफ्लू या टेमीवीर की पूरी डोज लेनी चाहिए।






भारत में एच1एन1 वायरस से अभी तक कुल 21,556 लोग चपेट में आ चुके हैं और 674 मौतें हो चुकी हैं। देश की आबादी को देखते हुए विशेषज्ञ इस संख्या को बहुत मामूली मानते हैं। इसी साल 17 अगस्त को द टाइम्स ऑफ इंडिया में एम्स में कम्युनिटी मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. बीर सिंह ने एक लेख लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि सीजनल फ्लू से रोजाना देश में 550 लोग मर जाते हैं जो एच1एन1 से कहीं ज्यादा खतरनाक है।

7 टिप्‍पणियां:

Krishna Kumar Mishra ने कहा…

अन्यथा न ले तो एक बात कहूं, आप जिस मुल्क से है वहा भेड़ियादशान है, किन्तु पूरी तरह से यही दशा हो तब भी ठीक, क्योम्कि भेड़िये भी सही दिशा और नेतृत्व के अनुसार चलते है।
ये सब साजिस है वैश्विक संस्थाओं की और थर्ड वर्ल्ड में जिस तरह के प्रयोग कथित विकसित मुल्कों द्वारा किए जा रहे हैं वो भविष्य में कितने घातक होगे ये तो वक्त बताएगा।

मनोज कुमार ने कहा…

अच्छी रचना। बधाई। ब्लॉगजगत में स्वागत।

अजय कुमार ने कहा…

हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी टिप्पणियां दें

नारदमुनि ने कहा…

sahi kaha aapne.narayan narayan

रचना गौड़ ’भारती’ ने कहा…

हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई। मेरे ब्लोग पर आपका स्वागत है।

डा. मेराज अहमद ने कहा…

odhe hue bhay ko ughadane ke liye dhannyavaad!

डा. मेराज अहमद ने कहा…

jhuthe bhay ke naqab ko ughadane ke liye badhaaii

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